प्राकृतिक चिकित्सा क्या होता है? फायदे व नुकसान – 2022

प्राकृतिक चिकित्सा: हमने और आपने कई बार ऐसी चिकित्सा के बारे में सुना कही न कही सुना ही होगा जिसमे हमे बिना अस्पताल गए हमारा इलाज करते है। अगर आपने दादी माँ के नुस्खे के बारे में सुना या पढ़ा है, तो वो भी इसी प्राकृतिक चिकित्सा का ही हिस्सा है। हालाँकि इसमें औषधि से जुड़ा इलाज काफी कम और न के बराबर होता है।

ऐसी ही प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में हम आपको हमारे इस लेख में बताने जा रहे है। इस आसान भाषा में लेख में आपको इस चिकित्सा पद्धति के बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी। इस के साथ ही इसके लाभ और इसकी विशेषता के बारे में भी बताया जाएगा।

प्राकृतिक चिकित्सा क्या होता है ?

यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमे हमे कई अस्पताल जाने की जरूरत नही रहती है। देश जड़ी बूटियों के माध्यम से ही इलाज किया जाना संभव होता है। इसमें कई तरह की विधियों के माध्यम से जड़ी बूटियों के साथ घर पर ही देशी तरीके से दवाई बनाई जाती है। 

प्राकृतिक चिकिस्ता प्राणतत्ववाद पर आधारित है ना की किसी विशेष चिकित्सा पर है। प्राकृतिक चिकित्सा कोई प्रमाणिक चिकित्सा नही है। इसके किसी भी तरह के प्रमाण नही मिलते है। प्राकृतिक चिकित्सा की एक ख़ास बात यह है की यह चिकित्सा इस आधार “शरीर में पैदा होने वाले रोगाणुओं से लड़ने की शरीर की स्वयं की और खुद की शक्ति” पर आधरित है। 

प्राकृतिक चिकित्सा कैसी है?

यह एक रचनात्मक विधि है, जिसमे काई तरह की दवाइयों के लिए कई तरह की प्राकृतिक रचना की जाती है। इसी चिकित्सा पद्धति में कई तरह की पद्धति है जैसे जल चिकित्सा, हेमियोपेथी सूर्य चिकित्सा, एक्यूपंक्सर इत्यादि। 

यह सभी चिकित्सा एक विशेष तरह की विधि पर ही आधारित है। यह एक रचनात्मक है जिसका मुख्य उद्देश्य है, जिसमे जितने भी तरह के प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध है, उनको मिलाकर और उनके माध्यम से लोगो से लड़ने के लिए कई तरह की विधियां बनाना है। 

दो प्रकार के रोग होते है

प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर माने तो इसमें 2 प्रकार के रोग होते है। यह दोनों निम्न है –

तीव्र रोग – यह वो रोग होते है जिसमे शरीर के विजातीय द्रव्यों का निष्कासन होता है। इस प्रकार के रोग में उलटी, दस्त इत्यादि होते है। 

जीर्ण रोग प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर माने तो शरीर में होने वाला यह रोग जीर्ण होता है। इसमें वो रोग होते है जो शारीर में अंदरूनी होते है। शरीर के अन्दर वाले भाग में होने वाले रोग जिसे अंदरूनी रोग कहते है, यह सभी तरह के रोग जीर्ण रोग के नाम से जाना जाता है। 

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

हम जिस चिकित्सा विधि के बारे में पढ़ रहे है। इस प्राकृतिक चिकित्सा विधि का इतिहास आज का नही बल्कि कितना पुराना है। इसके बारे में भी अगर हम जानकारी ले तो यह आज की चिकित्सा नही है बल्कि कई साल पुराणी है। 

ऐसा माना जाता है की हमारे देश और दुनिया में इस्तेमाल होने वाली यह सबसे प्राकृतिक चिकित्सा सबसे पुराणी चिकित्सा प्रणाली है। ऐसा माना जाता है की इस 19 वीं शताब्दी में चले यूरोप में इस प्राकृतिक आन्दोलन में इसकी जड़े निहित है। इस प्राकृतिक चिकित्सा के लिए 1980 में एक जाने माने शख्स थॉमस एलिसन हाईजेनिक मेडिसिन का प्रचार कर रहे थे। 

थोमा एलिसन ऐसी चिकित्सा पर जोर देते थे जिसमे आयाम – व्यायाम पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। वही वे इस चीज़ के भी खिलाफ थे की कोई अपनी सेहत में सुधार हेतु तम्बाकू खाता था। इसी चीज़ के खिलाफ होने के साथ ही वे केवल प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के साथ इलाज करने में यकीन रखते थे। 

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत

वर्तमान में हम जिस प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में पढ़ रहे है उसके सिद्धात यह कुछ निम् है। इसी के साथ ही हम इसमें कई तरह की जानकारी देखने और सुनने को मिलती है। यह सभी सिद्धांत इस प्रकार है। 

  • यह एक ऐसी चिकित्सा है जिसमे बीमारी भले ही कोई भी हो और कितने प्रकार की भी हो, इसमें सभी प्रकार की बीमारी का इलाज एक ही है। हालाँकि इसमें किसी चोट और वातावरण परिस्तिथि से संबधित बीमारी का इलाज अलग होता है। 
  • इस प्राकृतिक चिकित्सा की माने तो इसमें रोग का मुख्य कारण कोई जीवाणु नही होता है। शारीर में जीवाणु शरीर की जीवन शक्ति को हास करता है। 
  • इसमें इलाज तीव्र करने के प्रयास किया जाता है। हालाँकि इसमें ऐसा नही है की यह स्व उपचारात्मक होता है। इसमें भी और कई तरह की जानकारी बीमारी और उससे जुड़े इलाज से सम्बंधित होती है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा सबसे बड़ी चिकित्सा मानी जाने वाली चिकित्सा है। दुनिया में इसका इस्तेमाल के बारे में भले ही लोगो को कम जानकारी है परन्तु इसका विसात काफी बड़ा है और इस तकनीक से आज भी इलाज होते है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा से निदान थोडा नही बल्कि ज्यादा सरल है। यह एक ऐसी प्रक्रीया है जिसमे चिकित्सा प्रणाली के इलाज करने के बाद तोहड़ा रूकना पड़ता है परन्तु इसका इलाज एकदम सटीक है। 
  • इस प्रकार की चिकित्सा प्रकृति में किसी भी प्रकार के कोई आडम्बर की आवश्यकता नही होती है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी प्रणाली है जिसमे किसी भी प्रकार के इलाज को करने के बाद ज्यादा इन्तजार करने की जरूरत नही है बल्कि इसमें इलाज सबसे तेजी से होता है।
  • हम इस बात को तो जानते ही है की प्रकृति हमारे आसपास सबसे बड़ी चिकित्सा है और इसमें सबसे ज्यादा तेजी से इलाज किया जाता है।
  • प्रकृति चिकित्सा से तेजी से इलाज संभव है और इसमें कई तरह की विधिया भी है जिनसे हमे इलाज की जानकारी मिलती है। 
  • इस प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में ऐसा माना जाता है की इससे दबे रोग जो शारीर के अन्दर के घाव होते है वो भी उभर के सामने आ जाते है। ऐसा मान जाता है की इस पद्धति से इलाज करने एकदम आसान और सुरक्षित है। 
  • इस चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से सभी प्रकार की चिकित्सा यानी मानसिक, शारीरिक और भी कई तरह की चिकित्सा पद्धति के बारे में इलाज किया जा सकता है।
  • किसी भी शरीर के अंदर के घाव और इतियादी प्रकार का इलाज भी इसके जरिये किया जा सकता है जो की एक आम बात है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा के तहत औषधि का इस्तेमाल बिलकुल भी नही होता है बल्कि इसमें आहार को ही औषधि माना गया है।
  • गांधी जी की माने तो राम नाम ही सबसे बड़ी प्राकृतिक चिकित्सा है।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत के बारे में विस्तृत

प्राकृतिक चिकित्सा के मुख्य रूप से कुछ सिद्धांत है और इन्ही सिद्धांतों के आधार पर ही इस चिकित्सा को जाना जाता है। इस प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों के बारे में जानकारी इस प्रकार है – 

सभी रोग एक है?

प्राकृतिक चिकित्सा के एक सिद्धांत के आधार पर देखे तो इसमें हमे यह पता चलता है की सभी तरह के रोग एक ही है और इन रोगों का कारण भी एक ही है। सभी रोगों का इलाज भी एक ही है और इसमें प्राकृतिक चिकित्सा का सबसे बड़ा महत्त्व है। 

सभी तरह के रोग एक निच्छित वातावरण के आधार पर ही होते है और उनमे सभी में एक ही प्रकार का इलाज है। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा में सभी प्रकार के रोग एक से ही होते है। 

तीव्र रोग शत्रु नही बल्कि हमारे ही मित्र होते है?

प्राकृतिक चिकिसा की माने तो इसमें कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है। कई बीमारी तो मानसिक रूप से भी हो सकते है जिनका कारण आपके स्वयं के दोस्त भी हो सकते है। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोग दो प्रकार के हो सकते है। जिसमे एक तीव्र रोग है और दूसरा जीर्ण रोग। 

प्राकृतिक स्वयं चिकित्सक है?

प्राकृतिक चिकित्सा यह कहती है की प्रकृति स्वयं एक चिकित्सक है। इसके साथ ही इसका इलाज भी प्राकृतिक रूप से ही प्रकृति दुवारा किया जाता है। कई बार ऐसा भी देखने में आया है की हमारे आसपास जो भी घटनाये होती है वो प्रकृति की ही देन होती है। 

कई तरह की बीमारियाँ तो ऐसी होती है जिसका कोई इलाज नही होता है परन्तु प्रक्रति उसका इलाज खोज ही देती है। इसलिए ही प्रकृति को ही सबसे बड़ा चिकित्सक माना जाता है। 

चिकित्सा रोग की नही बल्कि पुरे शारीर की होती है

प्राकृतिक चिकित्सा की माने तो इसमें ऐसा कहा जाता है की शरीर में अगर की रोग होता है तो उस के लिए उसका इलाज किसी बीमारी का नही बल्कि पुरे शारीर का होता है। चिकित्सा पद्धति के आधार पर ही इलाज किया जाता है और उसमे पुरे शरीर का इलाज किया जाता है। यह इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। 

प्राकृतिक चिकित्सा में दबे रोग उभरते है 

ऐसा माना जाता है की प्राकृतिक चिकित्सा की पद्धति में शरीर के दबे रोगों का भी इलाज होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में शरीर के अंदर के घाव भी भरे जा सकते है। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

कई बार शरीर में ऐसी भी बीमारियाँ होती है जो बाहर से दिखाई नही देती है और ना ही वो दिखाई देता है। ऐसी बीमारी का इलाज करने के लिए भी प्राकृतिक चिकित्सा सबसे महत्वपूर्ण है। शरीर में दबे रोग का भी इलाज किया जाता है जो की इस चिकित्सा में महत्वपूर्ण है। 

व्यवहार के आधार पर प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा को अगर हम केवल व्यवहारिक पद्धति के आधार पर देखते है तो यह काफी कम व्यवहारिक होगा। चिकित्सा पद्धति के साथ साथ यह एक जीवन पद्धति भी है। व्यवहार के आधार पर भी इस प्राक्रतिक चिकित्सा को कई अलग – अलग भागों में बांटा गया है। 

प्राकृतिक चिकित्सा को आसान भाषा में एक ऐसी पद्धति मानते है जिसमे इसे औषधिविहीन चिकित्सा सेवा के नाम से भी जानते है। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर इसमें जो भी अलग – अलग भाग है उनमे यह कुछ निम्न है।

प्राकृतिक चिकित्सा सेवा मूल रूप से खान पान और रहन सहन पर आधारित होने के साथ – साथ यह औषधिविहीन चिकित्सा प्रणाली भी है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के यह कुछ प्रकार और व्यवहार इस प्रकार है जो निम्न में वर्णित है। 

मिट्टी व्यवहार पर आधरित चिकित्सा

मिट्टी या यूँ कहे की माटी से जुडी प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में भी हमें कई तरह की जानकारी पर चिकित्सा मिलती है। प्राचीन काल से ही ऐसा देखने में आता है की मिट्टी से कई तरह के इलाज किया जाते है। 

वर्तमान में वैज्ञानिको ने कई तरह के शोध किये है जिसमे मिट्टी पर कई प्रमाणिकता दी है। मिट्टी से कई इलाज किये जा सकते है। हम भी हमारे आसपास इस तरह का इलाज करते है। मान लीजिये हम कई खेल रहे है और और अचानक खेलते – खेलते गिर गये और पाँव में चोट आ गई, तो हम उस चोट पर अगर मिट्टी लगाते है तो जहा चोट लगी है वहा एकदम ठंडक पद जाती है। 

मिट्टी से बीमारी का इलाज करना वैसे तो कई मायनों में सही है परन्तु इससे शरीर के बाहर के चोट ठीक होते है वही इसमें शरीर के अन्दर के रोग ठीक नही होते है। अंदर के रोग ठीक करने के लिए इसमें कई तरह की पद्धति जोड़नी होती है। 

साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है 

इलाज के लिए साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। साफ़ मिट्टी की सहायता से स्नान करना यानी शरीर पर मिट्टी लगाना होता है। इससे काफी फायदा मिलता है। शरीर में जहा भी आपको लगे की शरीर में दर्द है तो वहा पर सुखी मिट्टी से स्नान करना चाहिए यानि उस जगह पर सुखी मिट्टी लगानी चाहिए। इससे शारीर में ठंडक सी मिलती है। 

साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है 

इसके साथ ही गीली मिट्टी का पेस्ट बनाना भी जरुरी होता है। इसमें मिट्टी को साफ़ छान ले और उसके बाद उस मिट्टी को रात भर भिगो के रखे उसके बाद उसका पेस्ट बना के उसे शरीर में लगाने से शरीर के कई घांव और दर्द ठीक हो जाते है। यह मिट्टी के बारे में विशेष लाभ है जिसकी वजह से ही इस प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी का अलग ही महत्त्व है। 

अंतिम शब्द 

इस लेख में आपको प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में बताया गया है। उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा और यह जानकारी अच्छी लगी होगी।

हमने और आपने कई बार ऐसी चिकित्सा के बारे में सुना कही न कही सुना ही होगा जिसमे हमे बिना अस्पताल गए हमारा इलाज करते है। अगर आपने दादी माँ के नुस्खे के बारे में सुना या पढ़ा है, तो वो भी इसी प्राकृतिक चिकित्सा का ही हिस्सा है। हालाँकि इसमें औषधि से जुड़ा इलाज काफी कम और न के बराबर होता है।

ऐसी ही प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में हम आपको हमारे इस लेख में बताने जा रहे है। इस आसान भाषा में लेख में आपको इस चिकित्सा पद्धति के बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी। इस के साथ ही इसके लाभ और इसकी विशेषता के बारे में भी बताया जाएगा।

प्राकृतिक चिकित्सा क्या होता है ?

यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमे हमे कई अस्पताल जाने की जरूरत नही रहती है। देश जड़ी बूटियों के माध्यम से ही इलाज किया जाना संभव होता है। इसमें कई तरह की विधियों के माध्यम से जड़ी बूटियों के साथ घर पर ही देशी तरीके से दवाई बनाई जाती है। 

प्राकृतिक चिकिस्ता प्राणतत्ववाद पर आधारित है ना की किसी विशेष चिकित्सा पर है। प्राकृतिक चिकित्सा कोई प्रमाणिक चिकित्सा नही है। इसके किसी भी तरह के प्रमाण नही मिलते है। प्राकृतिक चिकित्सा की एक ख़ास बात यह है की यह चिकित्सा इस आधार “शरीर में पैदा होने वाले रोगाणुओं से लड़ने की शरीर की स्वयं की और खुद की शक्ति” पर आधरित है। 

प्राकृतिक चिकित्सा कैसी है?

यह एक रचनात्मक विधि है, जिसमे काई तरह की दवाइयों के लिए कई तरह की प्राकृतिक रचना की जाती है। इसी चिकित्सा पद्धति में कई तरह की पद्धति है जैसे जल चिकित्सा, हेमियोपेथी सूर्य चिकित्सा, एक्यूपंक्सर इत्यादि। 

यह सभी चिकित्सा एक विशेष तरह की विधि पर ही आधारित है। यह एक रचनात्मक है जिसका मुख्य उद्देश्य है, जिसमे जितने भी तरह के प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध है, उनको मिलाकर और उनके माध्यम से लोगो से लड़ने के लिए कई तरह की विधियां बनाना है। 

दो प्रकार के रोग होते है

प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर माने तो इसमें 2 प्रकार के रोग होते है। यह दोनों निम्न है –

तीव्र रोग – यह वो रोग होते है जिसमे शरीर के विजातीय द्रव्यों का निष्कासन होता है। इस प्रकार के रोग में उलटी, दस्त इत्यादि होते है। 

जीर्ण रोग – प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर माने तो शरीर में होने वाला यह रोग जीर्ण होता है। इसमें वो रोग होते है जो शारीर में अंदरूनी होते है। शरीर के अन्दर वाले भाग में होने वाले रोग जिसे अंदरूनी रोग कहते है, यह सभी तरह के रोग जीर्ण रोग के नाम से जाना जाता है। 

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास

हम जिस चिकित्सा विधि के बारे में पढ़ रहे है। इस प्राकृतिक चिकित्सा विधि का इतिहास आज का नही बल्कि कितना पुराना है। इसके बारे में भी अगर हम जानकारी ले तो यह आज की चिकित्सा नही है बल्कि कई साल पुराणी है। 

ऐसा माना जाता है की हमारे देश और दुनिया में इस्तेमाल होने वाली यह सबसे प्राकृतिक चिकित्सा सबसे पुराणी चिकित्सा प्रणाली है। ऐसा माना जाता है की इस 19 वीं शताब्दी में चले यूरोप में इस प्राकृतिक आन्दोलन में इसकी जड़े निहित है। इस प्राकृतिक चिकित्सा के लिए 1980 में एक जाने माने शख्स थॉमस एलिसन हाईजेनिक मेडिसिन का प्रचार कर रहे थे। 

थोमा एलिसन ऐसी चिकित्सा पर जोर देते थे जिसमे आयाम – व्यायाम पर ज्यादा ध्यान दिया जाता था। वही वे इस चीज़ के भी खिलाफ थे की कोई अपनी सेहत में सुधार हेतु तम्बाकू खाता था। इसी चीज़ के खिलाफ होने के साथ ही वे केवल प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के साथ इलाज करने में यकीन रखते थे। 

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत

वर्तमान में हम जिस प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में पढ़ रहे है उसके सिद्धात यह कुछ निम् है। इसी के साथ ही हम इसमें कई तरह की जानकारी देखने और सुनने को मिलती है। यह सभी सिद्धांत इस प्रकार है। 

  • यह एक ऐसी चिकित्सा है जिसमे बीमारी भले ही कोई भी हो और कितने प्रकार की भी हो, इसमें सभी प्रकार की बीमारी का इलाज एक ही है। हालाँकि इसमें किसी चोट और वातावरण परिस्तिथि से संबधित बीमारी का इलाज अलग होता है। 
  • इस प्राकृतिक चिकित्सा की माने तो इसमें रोग का मुख्य कारण कोई जीवाणु नही होता है। शारीर में जीवाणु शरीर की जीवन शक्ति को हास करता है। 
  • इसमें इलाज तीव्र करने के प्रयास किया जाता है। हालाँकि इसमें ऐसा नही है की यह स्व उपचारात्मक होता है। इसमें भी और कई तरह की जानकारी बीमारी और उससे जुड़े इलाज से सम्बंधित होती है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा सबसे बड़ी चिकित्सा मानी जाने वाली चिकित्सा है। दुनिया में इसका इस्तेमाल के बारे में भले ही लोगो को कम जानकारी है परन्तु इसका विसात काफी बड़ा है और इस तकनीक से आज भी इलाज होते है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा से निदान थोडा नही बल्कि ज्यादा सरल है। यह एक ऐसी प्रक्रीया है जिसमे चिकित्सा प्रणाली के इलाज करने के बाद तोहड़ा रूकना पड़ता है परन्तु इसका इलाज एकदम सटीक है। 
  • इस प्रकार की चिकित्सा प्रकृति में किसी भी प्रकार के कोई आडम्बर की आवश्यकता नही होती है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी प्रणाली है जिसमे किसी भी प्रकार के इलाज को करने के बाद ज्यादा इन्तजार करने की जरूरत नही है बल्कि इसमें इलाज सबसे तेजी से होता है।
  • हम इस बात को तो जानते ही है की प्रकृति हमारे आसपास सबसे बड़ी चिकित्सा है और इसमें सबसे ज्यादा तेजी से इलाज किया जाता है।
  • प्रकृति चिकित्सा से तेजी से इलाज संभव है और इसमें कई तरह की विधिया भी है जिनसे हमे इलाज की जानकारी मिलती है। 
  • इस प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में ऐसा माना जाता है की इससे दबे रोग जो शारीर के अन्दर के घाव होते है वो भी उभर के सामने आ जाते है। ऐसा मान जाता है की इस पद्धति से इलाज करने एकदम आसान और सुरक्षित है। 
  • इस चिकित्सा प्रणाली के माध्यम से सभी प्रकार की चिकित्सा यानी मानसिक, शारीरिक और भी कई तरह की चिकित्सा पद्धति के बारे में इलाज किया जा सकता है।
  • किसी भी शरीर के अंदर के घाव और इतियादी प्रकार का इलाज भी इसके जरिये किया जा सकता है जो की एक आम बात है। 
  • प्राकृतिक चिकित्सा के तहत औषधि का इस्तेमाल बिलकुल भी नही होता है बल्कि इसमें आहार को ही औषधि माना गया है।
  • गांधी जी की माने तो राम नाम ही सबसे बड़ी प्राकृतिक चिकित्सा है।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत के बारे में विस्तृत

प्राकृतिक चिकित्सा के मुख्य रूप से कुछ सिद्धांत है और इन्ही सिद्धांतों के आधार पर ही इस चिकित्सा को जाना जाता है। इस प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांतों के बारे में जानकारी इस प्रकार है – 

सभी रोग एक है?

प्राकृतिक चिकित्सा के एक सिद्धांत के आधार पर देखे तो इसमें हमे यह पता चलता है की सभी तरह के रोग एक ही है और इन रोगों का कारण भी एक ही है। सभी रोगों का इलाज भी एक ही है और इसमें प्राकृतिक चिकित्सा का सबसे बड़ा महत्त्व है। 

सभी तरह के रोग एक निच्छित वातावरण के आधार पर ही होते है और उनमे सभी में एक ही प्रकार का इलाज है। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा में सभी प्रकार के रोग एक से ही होते है। 

तीव्र रोग शत्रु नही बल्कि हमारे ही मित्र होते है?

प्राकृतिक चिकिसा की माने तो इसमें कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है। कई बीमारी तो मानसिक रूप से भी हो सकते है जिनका कारण आपके स्वयं के दोस्त भी हो सकते है। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोग दो प्रकार के हो सकते है। जिसमे एक तीव्र रोग है और दूसरा जीर्ण रोग। 

प्राकृतिक स्वयं चिकित्सक है?

प्राकृतिक चिकित्सा यह कहती है की प्रकृति स्वयं एक चिकित्सक है। इसके साथ ही इसका इलाज भी प्राकृतिक रूप से ही प्रकृति दुवारा किया जाता है। कई बार ऐसा भी देखने में आया है की हमारे आसपास जो भी घटनाये होती है वो प्रकृति की ही देन होती है। 

कई तरह की बीमारियाँ तो ऐसी होती है जिसका कोई इलाज नही होता है परन्तु प्रक्रति उसका इलाज खोज ही देती है। इसलिए ही प्रकृति को ही सबसे बड़ा चिकित्सक माना जाता है। 

चिकित्सा रोग की नही बल्कि पुरे शारीर की होती है

प्राकृतिक चिकित्सा की माने तो इसमें ऐसा कहा जाता है की शरीर में अगर की रोग होता है तो उस के लिए उसका इलाज किसी बीमारी का नही बल्कि पुरे शारीर का होता है। चिकित्सा पद्धति के आधार पर ही इलाज किया जाता है और उसमे पुरे शरीर का इलाज किया जाता है। यह इसमें सबसे महत्वपूर्ण है। 

प्राकृतिक चिकित्सा में दबे रोग उभरते है 

ऐसा माना जाता है की प्राकृतिक चिकित्सा की पद्धति में शरीर के दबे रोगों का भी इलाज होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में शरीर के अंदर के घाव भी भरे जा सकते है। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

कई बार शरीर में ऐसी भी बीमारियाँ होती है जो बाहर से दिखाई नही देती है और ना ही वो दिखाई देता है। ऐसी बीमारी का इलाज करने के लिए भी प्राकृतिक चिकित्सा सबसे महत्वपूर्ण है। शरीर में दबे रोग का भी इलाज किया जाता है जो की इस चिकित्सा में महत्वपूर्ण है। 

व्यवहार के आधार पर प्राकृतिक चिकित्सा

प्राकृतिक चिकित्सा को अगर हम केवल व्यवहारिक पद्धति के आधार पर देखते है तो यह काफी कम व्यवहारिक होगा। चिकित्सा पद्धति के साथ साथ यह एक जीवन पद्धति भी है। व्यवहार के आधार पर भी इस प्राक्रतिक चिकित्सा को कई अलग – अलग भागों में बांटा गया है। 

प्राकृतिक चिकित्सा को आसान भाषा में एक ऐसी पद्धति मानते है जिसमे इसे औषधिविहीन चिकित्सा सेवा के नाम से भी जानते है। इसमें प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर इसमें जो भी अलग – अलग भाग है उनमे यह कुछ निम्न है।

प्राकृतिक चिकित्सा सेवा मूल रूप से खान पान और रहन सहन पर आधारित होने के साथ – साथ यह औषधिविहीन चिकित्सा प्रणाली भी है। प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के यह कुछ प्रकार और व्यवहार इस प्रकार है जो निम्न में वर्णित है। 

मिट्टी व्यवहार पर आधरित चिकित्सा

मिट्टी या यूँ कहे की माटी से जुडी प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में भी हमें कई तरह की जानकारी पर चिकित्सा मिलती है। प्राचीन काल से ही ऐसा देखने में आता है की मिट्टी से कई तरह के इलाज किया जाते है। 

वर्तमान में वैज्ञानिको ने कई तरह के शोध किये है जिसमे मिट्टी पर कई प्रमाणिकता दी है। मिट्टी से कई इलाज किये जा सकते है। हम भी हमारे आसपास इस तरह का इलाज करते है। मान लीजिये हम कई खेल रहे है और और अचानक खेलते – खेलते गिर गये और पाँव में चोट आ गई, तो हम उस चोट पर अगर मिट्टी लगाते है तो जहा चोट लगी है वहा एकदम ठंडक पद जाती है। 

मिट्टी से बीमारी का इलाज करना वैसे तो कई मायनों में सही है परन्तु इससे शरीर के बाहर के चोट ठीक होते है वही इसमें शरीर के अन्दर के रोग ठीक नही होते है। अंदर के रोग ठीक करने के लिए इसमें कई तरह की पद्धति जोड़नी होती है। 

साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है 

इलाज के लिए साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। साफ़ मिट्टी की सहायता से स्नान करना यानी शरीर पर मिट्टी लगाना होता है। इससे काफी फायदा मिलता है। शरीर में जहा भी आपको लगे की शरीर में दर्द है तो वहा पर सुखी मिट्टी से स्नान करना चाहिए यानि उस जगह पर सुखी मिट्टी लगानी चाहिए। इससे शारीर में ठंडक सी मिलती है। 

साफ़ मिट्टी का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है 

इसके साथ ही गीली मिट्टी का पेस्ट बनाना भी जरुरी होता है। इसमें मिट्टी को साफ़ छान ले और उसके बाद उस मिट्टी को रात भर भिगो के रखे उसके बाद उसका पेस्ट बना के उसे शरीर में लगाने से शरीर के कई घांव और दर्द ठीक हो जाते है। यह मिट्टी के बारे में विशेष लाभ है जिसकी वजह से ही इस प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी का अलग ही महत्त्व है। 

इस लेख में आपको प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में बताया गया है। उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा और यह जानकारी अच्छी लगी होगी।

1 thought on “प्राकृतिक चिकित्सा क्या होता है? फायदे व नुकसान – 2022”

  1. I am really thankful to the holder of this site who
    has shared this fantastic piece of writing at at this place.

    Reply

Leave a Comment

error: Content is protected !!