प्राकृतिक आपदा क्या है? | Loss of natural disaster 2022 |

प्राकृतिक आपदा और मानव निर्मित आपदा में अंतर, प्राकृतिक आपदाओं के नाम, प्राकृतिक आपदा के कारण, प्राकृतिक आपदा से बचने के उपाय

प्राकृतिक रूप से अचानक होने वाली कोई घटना जैसे बाढ़ आना, भूस्खलन होना, आंधी आना, भूकंप आना, ज्वालामुखी फटना, ग्लेशियर पिघलना आदि घटनाये आदि। ये सभी घटनाये प्राकृतिक रूप से घटित होती है। हालाँकि हमारे बैज्ञानिक काफी हद तक इन घटनाओं के बारे में पूर्वानुमान लगाने में सफल रहे है, लेकिन घटना कितनी बड़ी होने वाली उसकी सही – सही भौगोलिक स्थिति क्या होगी, इन सभी का एकदम सटीक पूर्वानुमान लगाना आज भी संभव नहीं हो पाया है। 

यही कारण है कि हमें लगातार प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओ के बारे में अक्सर सुनने को मिलता है। प्राकृतिक आपदाएं क्या है ? ये कितने प्रकार की होती है, इनके आने के क्या कारण हो सकते है आदि के बारे में हम जानने की कोशिश करेंगे।

आपदा का परिचय

खतरे का  ऐसा स्वरूप जिससे विशाल स्तर पर जन-धन वह भूमि की हानि होती है, उसे आपदा कहते हैं। उत्तराखंड में विशिष्ट भौगोलिक संरचना के कारण प्रतिवर्ष प्राकृतिक एवं मानव जनित आपदा का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदाओं को रोक पाना बहुत ही मुश्किल कार्य है, फिर भी आपदा से पूर्व यदि हम सतर्क रहें, तो काफी हद तक सुरक्षित रह सकते हैं ।यदि हमें आपदा के विषय में जानकारी है, तो आपदा के बाद जो खतरे उत्पन्न होते हैं उनसे हम सुरक्षित रह सकते हैं।

प्राकृतिक आपदा

इसलिए आज के समय में हमें आपदा की जानकारी रखना नितांत आवश्यक है, जिससे बड़े नुकसान से कुछ हद तक राहत मिल सके कुछ आपदा प्राकृतिक होती है लेकिन कुछ आपदाएं मानव जनित भी होती इसलिए हमें आपदा के विषय में जानकारी होना अति आवश्यक है। प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप एवं ग्लेशियरों का टूटना बहुत  खतरनाक होता है। आपदा को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जाता है ।

1- प्राकृतिक आपदा                        2 मानव जनित आपदा

प्राकृतिक आपदा

ऐसी आपदा जिसमें मानव का किसी भी प्रकार का वश नहीं चलता। प्राकृतिक आपदा एक प्राकृतिक जोखिम है, प्राकृतिक आपदाओं में भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट बाढ़ आना  हिम खंडों का टूटना अतिवृष्टि इत्यादि है। इन सभी प्रकार की आपदाओं में अपार जन धन की हानि बड़े पैमाने पर होती है, इन सभी आपदाओं से मनुष्य तथा पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है ।

प्राकृतिक आपदा भी कुछ भूमि से चालन होती है जैसे- भूकंप, भूस्खलन एवं मिट्टी का बहाव ज्वालामुखी विस्फोट एवं कुछ आपदाएं जलीय आपदा भी होती है, जिनमें बाढ़, सुनामी या मौसमी आपदाएं भी शामिल है, जिसमें बर्फीली हवाएं एवं सूखा मुख्य है।

मानव जनित आपदा

ऐसी आपदा जो प्रकृति द्वारा उत्पन्न नहीं होती है बल्कि मानव स्वयं इसका जिम्मेदार होता है उसे मानव जनित आपदा कहते हैं। मानव जनित आपदा के भी कई प्रकार है जिसमें बड़े बड़े उद्योगों में आग लगना जंगलों में आग लगना आतंकवादी घटनाएं वह मानव निर्मित बीमारियां जैसे हाल ही में कोरोना बीमारी ने सभी को दहशत में डाल दिया था यह भी एक प्रकार की आपदा थी यह सभी प्रकार की आपदायें मानव जनित आपदा है।

इसमें यदि थोड़ी बहुत भी सावधानी रख ली तो बहुत बड़ी खतरे से बचा जा सकता है। इसलिए हम जिस जगह पर भी काम करते हैं हर समय पेनी दृष्टि जरूर रखनी चाहिए।

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विभिन्न प्रकार की आपदा

अतिवृष्टि

बारिश के समय जब किसी क्षेत्र विशेष में अचानक तेज बारिश होती है, जिससे बादल फटने एवं भूस्खलन जैसी घटनाओं का जन्म होता है, उसे हम सामान्य तौर पर अतिवृष्टि कहते हैं ।

हिम खंडों का गिरना ।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां बर्फबारी बहुत ज्यादा होती है, ऐसे स्थानों पर शीतकालीन समय में बर्फ के बड़े-बड़े पहाड़ों के गिरने की घटनाएं होती है, जिससे वहां व्यापक स्तर पर जान-माल की हानि होती है, जिसका ताजा उदाहरण अभी उत्तराखंड चमोली जनपद की जोशीमठ के आसपास रेणी नामक गांव की घटना है। यहां पर भी अपार धन-धन की हानि हुई है।

भूकंप

भूकंप भूमि के अंदर की कंपन है, जिसकी लहरों द्वारा धरती कांप उठती है। भूकंप की उत्पत्ति भूमि के अंदर भू-गर्भीय प्लेटो की इधर-उधर खिसकने, टकराने एवं ज्वालामुखी विस्फोट होने से वह बड़ी-बड़ी बांध परियोजनाओं के निर्माण व उनके टूट जाने से भी भूकंप का खतरा बना रहता है। भू-वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय क्षेत्र उत्तराखंड में भूकंप अधिकतर प्लेटो की गतिशीलता के कारण आते हैं।

बाढ़

अत्यधिक वर्षा होने की कारण जब नदी नालों का जल स्तर बढ़ जाता है, इस जल स्तर से अपार जनधन की हानि की संभावना रहती है, उसे बाढ़ कहते हैं।

आपदा प्रबंधन

प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए उत्तराखंड पूरे राज्य के लिए आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र (DMMA) राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि का गठन किया गया है, इन सभी प्रकार केन बंधन में इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाता हैै। राज्य मैं जो भी आपदाएं आती है, इनकी जागरूकता के लिए यह अनेक कार्यक्रम संचालित करते हैं। जिससे लोगों में आपदा के प्रति जागरूकता फैल जाए, इसीलिए आपदा प्रबंधन विभाग का गठन सरकार द्वारा किया गया है।

आपदा के कारण

आपदा आने के पीछे मनुष्य ही का हाथ होता है। जब मनुष्य प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करता है, या प्रकृति का अत्यधिक दोहन करता है, तो प्रकृति पर अत्यधिक भार होने के कारण या संतुलित करने के लिए आपदा जैसी घटनाएं होती हैं।

अवैध खनन

नदी के किनारों पर रेत बजरी पत्थर की अत्यधिक मांग होने के कारण नदियों में अवैध खनन का कारोबार चरम पर है, जिससे भूस्खलन की की संभावनाएं अत्यधिक बढ़ जाती है।

बढ़ती जनसंख्या

पूरे देश में जनसंख्या निरंतर तीव्र गति से बढ़ रही है, इतनी बड़ी जनसंख्या को सड़क, घर या अन्य प्रकार की सुख-सुविधाओं हेतु प्रकृति का दोहन करना पड़ता है, जिससे आपदा आने की संभावना और बढ़ जाती हैं।

जंगलो का अवैध कटान

उत्तराखंड प्रदेश पहाड़िया मैदानी भागों में वृक्षों का अंधाधुंध कटान हो रहा है ।सभी प्रकार की पेड़ों का अवैध कटान हो रहा है जो प्रकृति के लियाज से बहुत ही खतरनाक है और यह छोटी-छोटी घटनाएं भविष्य में विभिन्न प्रकार की आपदाओं का कारण बन सकती है।

बड़े-बड़े बांधों का निर्माण

उत्तराखंड में कहीं नदियों पर बड़े-बड़े बांधों का निर्माण हो चुका है, और कहीं पर यह कार्य निर्माणाधीन है, जो भविष्य में भूस्खलन एवं बाढ़ जैसी घटनाओं को जन्म दे सकते हैं।

समाधान

पहाड़ी क्षेत्र की प्रमुख विशेषता अत्यधिक मात्रा में वन संसाधन का होना है। यदि इन वनों को काटे बिना विकास के कार्य किए जाते हैं, तो आपदा में काफी हद तक कमी आ सकती है। हिमालयी क्षेत्रों में जल की अधिकता के कारण निजी व सरकारी कंपनियों की तरफ से जल विद्युत परियोजनाओं की बाढ़ सी आ गई है, बड़े पैमाने पर पहाड़ों को तोड़ा जाता है, जिसमें कई प्रकार के विस्फोटकों का भी प्रयोग होता है, बड़े धमाकों से हिमालय की कच्ची पहाड़ियां हिल जाती हैं, जिससे आपदा आने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

इस प्रकार की योजनाओं के लिए पुनः समीक्षा करने की आवश्यकता है। जिससे पहाड़ों एवं वहां की वनस्पति के लिए किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो जिससे आपदा में कमी आ सकती है।

FAQ

प्रश्न – क्या प्राकृतिक आपदाओं का एकदम सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है ?

उत्तर – हालांकि हमारे बैज्ञानिक आज प्राकृतिक आपदाओं के बारे में काफी कुछ जान गए है। लेकिन फिर भी एकदम सटीक पूर्वानुमान लगा पाना संभव नहीं हो पाया है। पूर्वानुमान की यदि बात करें तो आंधी, तूफान, तेज बारिश, बाढ आदि के बारे में काफी हद तक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। लेकिन भूकंप, ज्वालामुखी आदि के बारे में एकदम सटीक पूर्वानुमान लगा पाना आज भी वैज्ञानिको के लिए चुनौती बनी हुई है। 

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